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औषधीय खेती – भारत के किसान भाइयों के लिए सुनहरा अवसर

1. औषधीय खेती भारत के किसान भाइयों के लिए सुनहरा अवसर भारत के किसान भाई फरवरी–मार्च के महीनों में, बरसात से पहले तैयार होने वाली  सब्जा (तुकमरिया) की खेती करके अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं।  केवल 3 महीने में तैयार होने वाली फसल  सही तरीके से खेती करने पर  ₹40,000 से ₹50,000 तक का संभावित लाभ क्यों करें सब्जा (तुकमरिया) की खेती?  कम समय में तैयार  कम लागत, अधिक मुनाफा  औषधीय एवं बाजार में मांग वाली फसल  जैविक तरीके से खेती संभव  सुविधाएं: बीज सीमित मात्रा में उपलब्ध पहले आएं पहले पाएं 2. चंदन की खेती से लाभ – किसानों के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव आज के समय में जब परंपरागत खेती में लागत बढ़ रही है और लाभ सीमित होता जा रहा है, ऐसे में चंदन (Sandalwood) की खेती किसानों के लिए एक दीर्घकालिक, सुरक्षित और अत्यधिक लाभकारी विकल्प है। 🌱 चंदन की खेती क्यों करें? चंदन एक बहुमूल्य औषधीय एवं सुगंधित वृक्ष है, जिसकी मांग आयुर्वेद, दवाइयों, इत्र, सौंदर्य प्रसाधन और धार्मिक उपयोगों में हमेशा बनी रहती है। इसकी कीमत समय के साथ बढ़ती जाती है। 💰 चंदन की खेती से प्रमुख लाभ ✔ उच्च बाजार मूल्य ✔ कम रखरखाव ✔ लंबी अवधि की सुरक्षित आय ✔ जमीन के मूल्य में वृद्धि ✔ बिहार की जलवायु के लिए उपयुक्त ✔ जैविक खेती के लिए अनुकूल 📊 🌳 प्रति 100 चंदन पौधों से अनुमानित लाभ (उचित देखभाल एवं 10–15 वर्ष की अवधि के आधार पर) औसतन 1 चंदन वृक्ष से 20–25 किलो हार्टवुड प्राप्त हो सकता है वर्तमान बाजार दर (संरक्षणात्मक अनुमान): ₹10,000–₹15,000 प्रति किलो 1 वृक्ष से अनुमानित मूल्य: ₹2,00,000 से ₹3,00,000 100 पौधों से अनुमानित सकल मूल्य: 👉 ₹2 करोड़ से ₹3 करोड़ तक (दीर्घकाल में) ⚠️ लाभ पौधों की वृद्धि, देखभाल, समयावधि, सरकारी नियमों एवं बाजार मूल्य पर निर्भर करता है। 🌿 जैविक तरीके से खेती का अतिरिक्त लाभ जैविक पद्धति से उगाए गए चंदन की गुणवत्ता बेहतर होती है, जिससे अधिक कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है और पर्यावरण भी सुरक्षित रहता है। 🤝 किसानों को पूरा सहयोग Ekma Saran Organic Producer Company Limited द्वारा: चंदन खेती का पूरा तकनीकी मार्गदर्शन पौधरोपण, होस्ट प्लांट, देखभाल की जानकारी जैविक खेती का प्रशिक्षण दीर्घकालिक प्लानिंग सपोर्ट   3. 1000 शतावरी पौधा प्रोजेक्ट Ekma Saran Organic Producer Company Limited के साथ ⏳ आय अवधि केवल 2 साल में अनुमानित आय 🌿 लगाने के विकल्प खेत में खेत की मेड़ पर बाहरी बाउंड्री पर बाग़ीचे / गार्डन में 🔹 अनुमानित उत्पादन विवरण कुल पौधे: 1000 ज़मीन की जरुरत 2.5 - 3 कट्ठा  प्रति पौधा गीली जड़: 3 किलो कुल गीली जड़ उत्पादन: 3000 किलो प्रोसेसिंग के बाद (10:1 अनुपात) 👉 सूखी शतावरी: 300 किलो (अनुमानित) 💰 अनुमानित बाजार भाव अनुसार आय भाव (₹/किलो)    कुल आय (₹) ₹300    ₹90,000 ₹400    ₹1,20,000 ₹500    ₹1,50,000 ₹600    ₹1,80,000 💸 पौधों की लागत 1000 शतावरी पौधों की अनुमानित लागत: 👉 ₹12,999/- मात्र ⚠️ महत्वपूर्ण सूचना / टिप यह उत्पादन एवं आय का एक अनुमानित आकलन है। वास्तविक उत्पादन व बाजार भाव मिट्टी, जलवायु, देखरेख, प्रोसेसिंग और समय के अनुसार कम या अधिक हो सकते हैं।   फार्मिंग बनाम इंडस्ट्रियल फार्मिंग — सामान्य खेती से व्यावसायिक खेती तक का सफ़र भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ सदियों से खेती केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि जीवन-पद्धति रही है। परंतु समय के साथ खेती के स्वरूप में बड़ा परिवर्तन आया है। आज हम दो तरह की खेती की चर्चा करते हैं— सामान्य फार्मिंग (Farming) और इंडस्ट्रियल फार्मिंग (Industrial Farming)। अक्सर लोग पूछते हैं— इन दोनों में अंतर क्या है? इसका सीधा और स्पष्ट उत्तर है— एक जीवनयापन की खेती है, दूसरी लाभ और व्यापार की खेती। 1. सामान्य फार्मिंग (Traditional / Normal Farming) सामान्य फार्मिंग वह खेती है जो परंपरागत तरीकों से की जाती है। इसका मुख्य उद्देश्य होता है— परिवार की जरूरतें पूरी करना स्थानीय बाजार में फसल बेचकर सीमित आय अर्जित करना मुख्य विशेषताएँ: छोटी जोत में खेती गेहूं, धान, मक्का जैसी पारंपरिक फसलें मौसम पर अधिक निर्भरता कम पूंजी निवेश आधुनिक तकनीक और प्रोसेसिंग का अभाव लाभ सीमित, जोखिम अधिक इस प्रकार की खेती में किसान मेहनत तो बहुत करता है, लेकिन बदले में उसे स्थिर और पर्याप्त आमदनी नहीं मिल पाती। यही कारण है कि किसान हमेशा कर्ज, लागत और भाव के दबाव में रहता है। 2. इंडस्ट्रियल फार्मिंग (Industrial / Commercial Farming) इंडस्ट्रियल फार्मिंग खेती को व्यवसाय के रूप में देखने का दृष्टिकोण है। यहाँ खेती केवल फसल उगाने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि पूरी वैल्यू चेन पर काम किया जाता है। मुख्य विशेषताएँ: बड़े या संगठित पैमाने पर खेती उच्च मूल्य वाली फसलें (औषधीय पौधे, मसाले, एक्सपोर्ट क्रॉप्स) आधुनिक तकनीक, ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग, मशीनरी का उपयोग प्लानिंग के साथ निवेश प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और ब्रांडिंग बाजार, बायबैक और निर्यात से जुड़ाव स्थिर और दीर्घकालिक मुनाफा यह खेती किसान को केवल उत्पादक नहीं, बल्कि उद्यमी (Entrepreneur) बनाती है। 3. मूल अंतर एक नज़र में विषय    सामान्य फार्मिंग    इंडस्ट्रियल फार्मिंग उद्देश्य    जीवनयापन    मुनाफा व विस्तार सोच    परंपरागत    व्यवसायिक तकनीक    सीमित    आधुनिक जोखिम    अधिक    प्रबंधित आमदनी    अनिश्चित    स्थिर व बढ़ती हुई भविष्य    संघर्षपूर्ण    समृद्ध निष्कर्ष आज के समय में केवल खेती करना पर्याप्त नहीं है, खेती को बिज़नेस बनाना ज़रूरी है। सामान्य फार्मिंग किसान को जीवित रखती है, लेकिन इंडस्ट्रियल फार्मिंग किसान को आत्मनिर्भर, समृद्ध और सम्मानित बनाती है। अब समय आ गया है कि किसान यह तय करे— उसे केवल खेती करनी है या खेती से उद्योग खड़ा करना है। यही अंतर है फार्मिंग और इंडस्ट्रियल फार्मिंग के बीच।   समय बदल रहा है — अब खेती बदलने का समय है समय के साथ चलना है तो 👉 काम-काज का तरीका बदलना होगा 👉 खेती-किसानी की सोच बदलनी होगी 👉 फसलों का चयन बदलना होगा यदि आप सच में तरक्की करना चाहते हैं तो। 1 एकड़ पर ₹50,000 से ₹1,00,000 कमाना अब पुराने दौर की बात हो चुकी है। अब समय है नई तकनीक अपनाकर खेती को उद्योग में बदलने का। अब समय है Commercial Farming का। अब समय है भीड़ से अलग हटकर कुछ नया करने का। लेकिन सबसे बड़ा सवाल — ❓ क्या करें? ❓ कौन सी फसल लगाएँ? ❓ कहाँ बेचें? ❓ किसको बेचें? ❓ कब बेचें? ❓ कैसे उगाएँ? ❓ इसकी गारंटी कौन देगा? ✅ अब बेफिक्र रहिए… 🤝 एकमासारण आर्गेनिक प्रोडूसर कंपनी लिमिटेड से हाथ मिलाइए और पाईए अपने सभी सवालों के जवाब — सच्चाई, प्रमाण और अनुभव के साथ। हम आपको तैयार करते हैं: ✔ प्रति एकड़ ₹5 लाख से ₹10 लाख तक आय की दिशा में ✔ कम से कम लागत में ✔ बिना डर और असमंजस के ✔ पूर्ण मार्गदर्शन और सपोर्ट के साथ 🎓 हमारे प्रशिक्षण कार्यक्रम से जुड़िए 🌿 औषधीय एवं व्यावसायिक खेती पर आधारित विशेष मॉडल 🌿 रोजगार का शानदार अवसर 🌿 1 फसल के साथ प्रशिक्षण शुल्क मात्र ₹12,999/- 📞 अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें: 🌐 Website: www.agrohelpline.com 🙏 ekmasaran organic producer company limited खेती को व्यवसाय बनाइए — और व्यवसाय को सफलता में बदलिए। 🌾   *अश्वगंधा की खेती से किसान उत्थान: नमस्ते!   आज हम एक ऐसे विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं, जो न केवल हमारे किसानों के लिए, बल्कि पूरे देश की अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकता है—*अश्वगंधा की खेती। अश्वगंधा, जिसे वैज्ञानिक रूप से *विथानिया सोम्निफेरा के नाम से जाना जाता है, एक औषधीय पौधा है, जिसकी जड़ें और पत्तियाँ प्राचीन आयुर्वेद में शक्तिवर्धक और तनाव निवारक दवा के रूप में उपयोग होती रही हैं। आज, वैश्विक स्तर पर इसकी मांग तेजी से बढ़ रही है, और यह हमारे किसानों के लिए सुनहरा अवसर ला सकता है।    अश्वगंधा की खेती का महत्व 1. *आर्थिक लाभ*:      अश्वगंधा की खेती कम लागत में शुरू की जा सकती है। यह पौधा कम पानी और कम उपजाऊ भूमि में भी अच्छी तरह उगता है। एक एकड़ में लगभग 4-5 क्विंटल सूखी जड़ें प्राप्त हो सकती हैं, जिनकी बाजार में कीमत 150-300 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो सकती है। इससे किसानों को प्रति एकड़ 50,000 से 1 लाख रुपये तक की शुद्ध आय हो सकती है। 2. *बढ़ती मांग*:      वैश्विक स्तर पर हर्बल और आयुर्वेदिक उत्पादों की मांग बढ़ रही है। अश्वगंधा का उपयोग तनाव कम करने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, और अन्य स्वास्थ्य लाभों के लिए किया जाता है। फार्मास्यूटिकल्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स, और कॉस्मेटिक्स उद्योगों में इसकी मांग इसे एक नकदी फसल बनाती है। 3. *पर्यावरणीय लाभ*:      अश्वगंधा की खेती पर्यावरण के अनुकूल है। यह सूखा-सहिष्णु पौधा है, जो पानी की कमी वाले क्षेत्रों में भी उगाया जा सकता है। यह मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखने में भी मदद करता है। ### किसानों के लिए अवसर 1. *कम जोखिम, अधिक लाभ*:      पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं और चावल की तुलना में अश्वगंधा की खेती में कीट और रोगों का खतरा कम होता है। साथ ही, इसकी खेती के लिए महंगे उर्वरकों या कीटनाशकों की आवश्यकता नहीं पड़ती। 2. *वैश्विक बाजार*:      भारत अश्वगंधा का सबसे बड़ा उत्पादक और निर्यातक देश है। अमेरिका, यूरोप, और अन्य देशों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। किसान निर्यात के लिए जैविक अश्वगंधा की खेती करके और भी अधिक लाभ कमा सकते हैं। 3. *महिलाओं और छोटे किसानों के लिए वरदान*:      अश्वगंधा की खेती छोटे और सीमांत किसानों के लिए विशेष रूप से लाभकारी है। इसके लिए बड़े खेतों की जरूरत नहीं है, और इसे घरेलू स्तर पर भी उगाया जा सकता है। महिलाएँ भी इसकी खेती और प्रसंस्करण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। ### कैसे शुरू करें अश्वगंधा की खेती? 1. *उपयुक्त जलवायु और मिट्टी*:      अश्वगंधा को गर्म और शुष्क जलवायु पसंद है। यह रेतीली, दोमट, या लाल मिट्टी में अच्छी तरह उगता है। भारत के अधिकांश क्षेत्र, जैसे राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, और महाराष्ट्र, इसके लिए उपयुक्त हैं। 2. *बुवाई और देखभाल*:      बुवाई मानसून की शुरुआत (जून-जुलाई) में की जाती है। बीजों को नर्सरी में तैयार कर या सीधे खेत में बोया जा सकता है। पौधों को 6-8 महीनों में कटाई के लिए तैयार किया जा सकता है। 3. *प्रशिक्षण और सरकारी सहायता*:      सरकार और कृषि विश्वविद्यालय अश्वगंधा की खेती के लिए प्रशिक्षण और सब्सिडी प्रदान करते हैं। राष्ट्रीय औषधीय पादप बोर्ड (NMPB) और आयुष मंत्रालय जैसी संस्थाएँ किसानों को सहायता प्रदान करती हैं। ### चुनौतियाँ और समाधान - *जागरूकता की कमी*: कई किसान अश्वगंधा की खेती के लाभों से अनजान हैं। इसके लिए कृषि मेलों, कार्यशालाओं, और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से जागरूकता फैलाने की जरूरत है।   - *बाजार तक पहुँच*: छोटे किसानों को बाजार तक पहुँचने में कठिनाई हो सकती है। सहकारी समितियाँ और डिजिटल मार्केटप्लेस इस समस्या को हल कर सकते हैं।   - *गुणवत्ता नियंत्रण*: जैविक और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों की मांग को पूरा करने के लिए किसानों को जैविक खेती और प्रमाणन की जानकारी लेनी चाहिए। निष्कर्ष अश्वगंधा की खेती न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकती है, बल्कि यह भारत को वैश्विक औषधीय बाजार में अग्रणी बनाए रखने में भी मदद करेगी। यह हमारे किसानों के लिए एक नया रास्ता है, जो मेहनत और समर्पण के साथ समृद्धि की ओर ले जाएगा। आइए, हम सब मिलकर इस औषधीय फसल को अपनाएँ और अपने किसानों को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दें।   CONTACT FOR MOR INFORMATION JAI BHIM GYAN PITH SEVA SANSTHAN MOB. 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Indian Institute of Skill Training The main function of the Trust is to provide higher technical education for every group of urban and rural areas to get success in computer revolution which is the main dream of Indian Govt. Indian Institute of Skill Training is a Organization engaged in the work of social welfare, started with a mission to education service and spread literacy to all class of people.

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ISO 9001:2015 CERTIFIED NGO  Certificate No:- LT-QM01918M03/26 (Quality Management System) For the following scope of activities Providing Educational and Social Welfare Activities, Awareness Programs, Community Development Services and Sanitary Pad Product Distribution Through NGO JAI BHIM GYAN PITH SEVA SANSTHAN   

JAI BHIM PROJECT PLAN 2026

JAI BHIM PROJECT PLAN 2026

Empowering Communities Through Education, Employment & Social Development

JAI BHIM PROJECT PLAN 2026 is a flagship community development initiative of JAI BHIM GYAN PITH SEVA SANSTHAN. The project aims to empower economically weaker, marginalized, and underprivileged communities by providing quality education, skill development, employment opportunities, women empowerment, healthcare awareness, entrepreneurship support, and social welfare services. The initiative is designed to create sustainable livelihoods and promote inclusive development through community participation. The project is also highlighted among the institution's major initiatives.

Project Objectives

  • Promote quality education and digital literacy.

  • Generate sustainable employment and self-employment opportunities.

  • Provide skill development and vocational training.

  • Empower women through entrepreneurship and livelihood programmes.

  • Support children from economically weaker families with educational assistance.

  • Promote constitutional values, equality, and social justice.

  • Improve health awareness and preventive healthcare.

  • Strengthen community participation for rural and urban development.

Key Programme Components

  • Education & Career Guidance

  • Skill Development & Vocational Training

  • Women Empowerment

  • Youth Employment & Entrepreneurship

  • Health & Nutrition Awareness

  • Digital Literacy Programmes

  • Human Rights & Legal Awareness

  • Community Development & Social Welfare

  • Environmental Conservation & Plantation Drives

  • Leadership Development and Capacity Building

Expected Impact

  • Improved access to education for disadvantaged children and youth.

  • Enhanced employability through practical skill training.

  • Increased income opportunities for women and rural families.

  • Greater awareness of health, hygiene, and constitutional rights.

  • Stronger community institutions and local leadership.

  • Sustainable social and economic development across project areas.

Vision

To build an educated, empowered, healthy, and self-reliant society where every individual has equal opportunities to learn, grow, and live with dignity.

Mission

To transform lives through education, skill development, employment generation, social welfare, and community-led development while promoting equality, inclusion, and sustainable progress.

"Educate • Empower • Employ • Transform"

Empowering learners through flexible, affordable, and quality education. Explore UG, PG, Diploma & PG Diploma programs through Open & Distance Learning (ODL).

About the University

Mata Tripura Sundari Open University, Udaipur, District Gomati, Tripura was established through an Act of the Government of Tripura and has been notified through Tripura Gazette on the 27th February, 2024. The mission of the University has been to provide quality education, skill education and training to the youth of the State of Tripura and the adjoining States through open and distance learning,>

The University aims to develop qualified youth with skill proficiency and competency at different levels as per the National / State qualifications of formal and skill education, to ensure pathways for progression and mobility with flexible learning systems. Mata Tripura Sundari Open University (MTSOU) is Recognized under UGC 2(f) provisions, the University is committed to providing high-quality distance education in line with national standards. With a vision of fostering multidisciplinary and allied research, MTSOU aims to create a joyful, inclusive, and academically rigorous learning environment.

OUR VISION

To emerge as a leading institution in open and>

OUR MISSION

To develop a competency-based, flexible, and inclusive education ecosystem through innovative credit frameworks, blended and>

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